Monday, April 11, 2011

kuchha shair

''सदियों  पहले  मेरी ग़ज़ल को उसने चूमा था
उसकी आँखों में अभी तक है मोहब्बत का नशा ''
२)अब गुजर जाये चाहे जन्हा जिंदगी
   चाँद सांसो का कारवां है जिंदगी
   तुमने हमसे कहा हमने तुमसे कहा
   इस तरह बन गई दास्ताँ जिंदगी "

३)तड़प कर जब भी इस दिल से कोई भी आह निकली है
   ज़माने ने सुना है जिक्र तेरी बेवफाई का "

४)कारवां कितने लूटे उजड़ी है कितनी बस्तियां
   आज कल अखबार में बस ये ही चर्चा आम है "

५)चलो अब अलविदा कह के तमन्नाओं की बस्ती से
   गुज़र के इस जंहा से दूसरा फिर एक जंहा होगा "
                                                                                   १२/०४/2011