भक्त जनों ........................
कितना अपार आनंद है .परम् संतोष है इस सात दिवसीय रामकथा में .....आप सब कितने भाग्यशाली है जो इस रामकथा को सुनने का सोभाग्य आप सबको मिला ........
१) जैसा की आप सभी को ज्ञात है इस तरह के आयोजन में सवा लाख, डेढ़ लाख तक का खर्चा आता ही है .तो अधिक अधिक सहयोग कर इस आयोजन और स्ययम के जीवन को सफल बनायें .
२) कल राम कथा का चौथा दिन है .राम जन्मोत्सव का परमानन्द प्रसाद स्वरुप आप सबको ग्रहण करना है . .रामजन्मोत्सव पर भेंट स्वरुप मातायें -बहने पूर्ण श्रद्धा से न्योछावर अर्पित करेंगी .
३) आप सभी माताओं -बहनों का अनुरोध है की महाराज जी हमारे घर पधारें .भोजन ग्रहण करे जिससे की हमारा घर ,हमारा जीवन पवित्र हो . हम आपकी भावनाओ को समझते है किन्तु प्रत्येक के घर जा कर भोजन ग्रहण कर पाना संभव नहीं तो जो भी श्रद्धालू /भक्त भोजन करवाने की इच्छा रखते है वो यंहा पांडाल में 55OO / (पचपन सौ )रूपये जमा करवा कर वही सौभाग्य और आनंद प्राप्त कर सकते है ...आज कथा को यहीं विश्राम देते है ........बोलो सिया बल राम चन्द्र जी की जय ...................................................................
....................मित्रों यह हमारे मोहल्ले में चल रही रामकथा का संवाद है जैसा सुना यहाँ लिख दिया ..........लेकिन उसके पश्चात मन दुखी हो गया .....मोहल्ले की नाली साफ़ करने वाले स्वीपर को 20-20 देने के नाम पर झगड़ पड़ने वाले , छोटी -छोटी बात पर अपने पड़ोसियों से झगडा करने वाले ,छोटी -छोटी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी सरकार /प्रशासन को कोसने वाले लोग , स्वार्थ और अज्ञानता से स्ययम का ही नहीं अपने आस/पास के लोगो का भी अहित चाहने वाले .....इस प्रवचन से कितना लाभ उठा पायेंगे कह नहीं सकता .......कथावाचक महाराज और उनकी शिष्य मंडली का लाभ सर्व विदित है ......
.......कोई रोकता क्यूँ नहीं ये सब ....बताता क्यूँ नहीं कि इन ढोंगियों के बुद्धिचातुर्य को सुनने की बजाये ...एक क्षण को पूर्ण शांति के साथ अपने मन की सुने ....मन के भीतर की कड़वाहट को बाहर फेंक ...मन के भीतर प्रेम का प्रवेश होने दे ....प्रेम अपने प्रति /दूसरों के प्रति ....यह कार्य बिना दान -दक्षिणा के भी संभव है ....और बिना भव्य धार्मिक आयोजनों के
कितना अपार आनंद है .परम् संतोष है इस सात दिवसीय रामकथा में .....आप सब कितने भाग्यशाली है जो इस रामकथा को सुनने का सोभाग्य आप सबको मिला ........
१) जैसा की आप सभी को ज्ञात है इस तरह के आयोजन में सवा लाख, डेढ़ लाख तक का खर्चा आता ही है .तो अधिक अधिक सहयोग कर इस आयोजन और स्ययम के जीवन को सफल बनायें .
२) कल राम कथा का चौथा दिन है .राम जन्मोत्सव का परमानन्द प्रसाद स्वरुप आप सबको ग्रहण करना है . .रामजन्मोत्सव पर भेंट स्वरुप मातायें -बहने पूर्ण श्रद्धा से न्योछावर अर्पित करेंगी .
३) आप सभी माताओं -बहनों का अनुरोध है की महाराज जी हमारे घर पधारें .भोजन ग्रहण करे जिससे की हमारा घर ,हमारा जीवन पवित्र हो . हम आपकी भावनाओ को समझते है किन्तु प्रत्येक के घर जा कर भोजन ग्रहण कर पाना संभव नहीं तो जो भी श्रद्धालू /भक्त भोजन करवाने की इच्छा रखते है वो यंहा पांडाल में 55OO / (पचपन सौ )रूपये जमा करवा कर वही सौभाग्य और आनंद प्राप्त कर सकते है ...आज कथा को यहीं विश्राम देते है ........बोलो सिया बल राम चन्द्र जी की जय ...................................................................
....................मित्रों यह हमारे मोहल्ले में चल रही रामकथा का संवाद है जैसा सुना यहाँ लिख दिया ..........लेकिन उसके पश्चात मन दुखी हो गया .....मोहल्ले की नाली साफ़ करने वाले स्वीपर को 20-20 देने के नाम पर झगड़ पड़ने वाले , छोटी -छोटी बात पर अपने पड़ोसियों से झगडा करने वाले ,छोटी -छोटी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी सरकार /प्रशासन को कोसने वाले लोग , स्वार्थ और अज्ञानता से स्ययम का ही नहीं अपने आस/पास के लोगो का भी अहित चाहने वाले .....इस प्रवचन से कितना लाभ उठा पायेंगे कह नहीं सकता .......कथावाचक महाराज और उनकी शिष्य मंडली का लाभ सर्व विदित है ......
.......कोई रोकता क्यूँ नहीं ये सब ....बताता क्यूँ नहीं कि इन ढोंगियों के बुद्धिचातुर्य को सुनने की बजाये ...एक क्षण को पूर्ण शांति के साथ अपने मन की सुने ....मन के भीतर की कड़वाहट को बाहर फेंक ...मन के भीतर प्रेम का प्रवेश होने दे ....प्रेम अपने प्रति /दूसरों के प्रति ....यह कार्य बिना दान -दक्षिणा के भी संभव है ....और बिना भव्य धार्मिक आयोजनों के