Kavi Chavi
Saturday, September 8, 2012
आदरणीय नवल जी .....सविनय धन्यवाद सहित ....आभार आपके द्वारा की गई समीक्षा इतनी सटीक ,सार्थक होती है कि ....खुद की ही रचना को पुनः पढने ....पुनः गढ़ने की छह हो उठती है ...निश्चित ही इस रचना में वो कमियां रह गई जो परस्पर पंक्तियों को आबद्ध कर स्ययम को
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