आदरणीय नवल जी ....यह मंच आपके लिए साधना स्थल की तरह है .....यंहा किसी भी तरह व्यवधान ...विकृति ....आपको भावनात्मक रूप से आहत ...वैचारिक रूप से आक्रोशित करेगी। मै आपकी पीड़ा को समझ भर सकता हूँ ...उसकी गहनता का अंदाजा लगा पाना मेरे बस की बात नहीं।......... आप वरिष्ठ सम्मानित मित्रों ने उपस्थित हो कर मेरी रचना को जो मान ...अवं मुझे जो उर्जा दी ,वह मेरी स्मृतियों में स्पंदित होता रहेगा ....जो उपस्थित नहीं हो सके ...संभव है उनकी कोई विवशता रही होगी ....दैनिक ,पेशागत ,वैचारिक, व्यतिगत ...अब जो है ही नहीं उनके लिए क्या जी जलाना ....मै व्यतिगत रूप से वचनबद्ध हूँ की जब तक भी इस मंच रहूँगा मेरे लिए प्रस्तुत सृजन ,प्रस्तुत रचनायें ही अपने गुण-दोषों के साथ महत्त्वपूर्ण होगीं ....सृजन किसका है ...रचनाकार कौन है ....ये नहीं ....कभी नहीं। .....सादर .....
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