Monday, December 17, 2012

सम्मानित मंच ...आदरणीय सपन सर ....सादर प्रणाम ....जितना भी और जैसे भी संभव हो सका ...इस गंभीर साहित्यिक वार्ता से जुड़ा रहा ...सभी  सम्मानित मित्रों ने गंभीर विचारों के साथ इस चर्चा को गति दी ...विस्तार दिया ....और उन सभी विचारों के साथ आदरणीय सपन सर ने इस वार्ता को जिस स्तर तक पहुँचाया ....क्या वह छोटी सफलता है ....तत्काल परिणाम की अपेक्षा स्वाभाविक नहीं ....न ही किसी सर्वमान्य निष्कर्ष तक पहुँच पाना इतना सहज ...लेकिन ..लेकिन  ....जब विचार स्थापित होता है तब परिणाम और  निष्कर्ष की सम्भावनाये प्रबल हो उठती है ....और इस गंभीर चर्चा से उस सम्भावना को बल मिला है ...मै इसे इस सम्मानित मंच की बहुत बड़ी सफलता मानूंगा ....मै ह्रदय से बधाई देना चाहूँगा ...इस वार्ता में उपश्थित एक-एक विचार को ....धन्यवाद कहना चाहूँगा इस इस निस्वार्थ साहित्य -सेवा के लिए समर्पित आप वरिष्ठ जनों को ....आपने जो अलख जगाई है ...उसका प्रकाश यही तक सीमित रहने वाला नहीं ....फैलेगा ..चहुँ और फैलेगा .....आदरणीय सपन सर ...मन की पूर्ण श्रद्धा से आपके इस गंभीर प्रयास के लिए नमन करता हूँ ...शत-शत नमन ...सादर।।।

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