Monday, December 24, 2012

वहशीपन के खेल ये तेरे अंगना आम
सारे जग की गालियाँ दिल्ली तेरे नाम .........गहन संवेदनात्मक स्तर पर जा कर पीड़ा को उसी तीव्रता के साथ अभिव्यक्त किया आपने ....आदरणीय पंकज जी .....निसंदेह कविता ने अपने सरोकारों को बखूबी गाया .........प्रतिक्रिया के साथ ही एक विचार जोड़ रहा हूँ ....
" 1)कल मै परेशान था ...शांति के लिए तालाब किनारे पार्क में जा बैठा ....अपनी एक अधूरी कविता को पुनः-पुनः गुनगुनाने की कोशिश कर रहा था ....की जो देखा उसने उद्वेलित कर दिया ...अपनी आँखों के सामने 2 यौन-अपराध होते हुए देखा ....किसी का कोई भय नहीं ...कोई आशंका नहीं ...दोनों तरफ युगल प्रेमी मर्यादाओं को ताक पर रख पशुवत व्यवहार कर रहे थे ...जानना चाहेंगे उनकी आयु ... महिला की आयु लगभग 16-17 वर्ष ...पुरुष 20 -21 वर्ष ......मित्रों यह सामाजिक ,नैतिक अवहेलना नहीं ...वरन यौन अपराध था ...नाबालिग की सहमति से किया गया यौनाचार भी यौन-अपराध की श्रेणी में आता है ....यह कानूनी प्रावधान है ...और इस कानून की अवहेलना आज हम सरेराह ..सरेआम पार्को में देखते है ...शर्म से मुँहफेर लेते है ...या गुस्से के साथ कही और निकल जाते है ....कोई और विकल्प है हमारे पास .................?

2) आज हम उत्तेजित है ...आंदोलित है ...हम सख्त कानूनों की मांग कर रहे है ...लेकिन हममे से कितने लोग है जिन्होंने स्ययम स्थापित क़ानूनी प्रावधानों को समझा है ...सम्मान देने का प्रयास किया किया ...कानून सम्मत नागरिक अधिकारों /कर्तव्यों को जिया है ....हम हवा की रफ़्तार से गाडी चलाते है ...हम स्वछन्द ,असंयमित व्यवहार करते है ...जरा -जरा सी बात पर कुत्ते -बिल्लियों सा लड़-झगड़ पड़ते हैं ...दरअसल हम सब छोटे-छोटे अपराधी है ...जिनके अपराध छोटी -छोटी दफाओं के तहत आते है ....और आज हम सब मिलकर सख्त कानून की बात कर रहे हैं .....कानून अपनी सख्ती से नहीं वरन अपने प्रति सम्मान के भाव से अधिक असरकारक होता है ...वह सम्मान भाव हमें अपने भीतर पैदा करना होगा ...हमें पूर्ण नागरिक अधिकारों के साथ ...सम्पूर्ण नागरिक /नैतिक कर्तव्यों के साथ जीने की आदत डालनी होगी .....तभी -तभी ...कानून अधिक असरकारक होगा और हमारे भीतर का अपराधी ,हमारे आस-पास के आपराधिक तत्व भयभीत .......सादर .........................

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