आदरणीय नील जी ....सादर प्रणाम ..मुझे याद है शायद लगभग 2 माह पूर्व मैंने आपकी प्रथम रचना पढ़ी थी .....क्या गजब आकर्षण था ...आमंत्रण था उस रचना में ....प्रफुल्लित मन से प्रतिक्रिया भी दी थी ...उसके पश्चात अन्य रचनायें भी पढ़ी ..अपने आंशिक गुण -दोषों के साथ सभी में एक कविता थी ....लेकिन क्षमा चाहूँगा ...आज सिर्फ कविता गायब है ....बाकी सब है ...मुझे लगता है ...रचना के चुनाव में आपसे त्रुटी हुई है ...अन्यथा आप जिस प्रतिभा के साथ पूर्व में आते रहे है ...वह आज और निखर कर सामने आती ....सादर ..आज आपने थोडा निराश किया ....लेकिन आपके अन्दर वह आग्रह है जो कल फिर हम सब मित्रों को चौका देगा ....सादर।.
No comments:
Post a Comment