Kavi Chavi
Saturday, January 5, 2013
आदरणीय शुक्ल जी ....प्रतीकों के साथ उपस्थिति ... भावों की प्रस्तुति का सहज किन्तु गंभीर माध्यम है .....इसमें छोटी सी भूल ...अर्थ का अनर्थ कर जाती है ......जैसा की आदरणीय तयाल जी ....सिया जी ने इंगित किया .....सादर ....
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment