" आज स्ययम जागृत होने ...सभी को जागृत करने का समय हैं ...यह कठोर दंड प्रावधानों से हो पाए ...संदेह है ....लेकिन वैचारिक शुचिता के साथ जीवन के हर क्षेत्र में सांस्कृतिक ,आध्यात्मिक ,नैतिक आन्दोलन से यह पूर्णतः संभव होगा ...ऐसा मुझे विश्वास है ...नव विचारों के साथ, हम सब युवा हैं ....तो चलो सब मिल ..... ......."अंधेरों की तरफ ...विकृतियों की तरफ ....अज्ञानता की तरफ .../ इन्हें परास्त करने के लिए ...सभ्य समाज गढ़ने के लिए ....
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