क्या ये प्रजातंत्र है,क्या ये प्रजातंत्र है
शोर है चारों तरफ खामोशियाँ चारों तरफ
साजिशें चारों तरफ सरगोशियाँ चारों तरफ
मख्खियों की भिनभिनाहट ,मच्छरों के डंक है
सत्य है सहमा हुआ हँसता हुआ आतंक है
क्या ये प्रजातंत्र है क्या ये प्रजातंत्र है ....................
०१/०७/2011
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