Saturday, June 8, 2013

"सम्मानित  मंच ... वरिष्ठ एवं  सम्मानित मित्रों ...मेरी क्षणिक उपस्थिति का कारण यह नहीं कि मै व्यस्त हूँ ....कारण यह है की मै  अस्त-व्यस्त हूँ ...साधारण से मोबाईल पर सम्मानित मंच की गतिविधियों को निरंतर  पढ़ तो पाता  हूँ ...लेकिन शाब्दिक सहभागिता दे पाना उस मोबाईल से संभव नहीं ...सहभागिता के लिए मुझे नेट-कैफे पर ही जाना होता है ...इस विवशता में मंच पर प्रस्तुत बहुत सी सुन्दर /सार्थक रचनाओ ...साहित्यिक विचार-विमर्श ...गतिविधियों में पूर्ण रूप से सम्मिलित नहीं हो पाता ...ह्रदय से क्षमाप्रार्थी हूँ उन समस्त रचनाओं से ...गतिविधियों से ..आपसे ....मुझे पूर्ण विस्वास है ..मरी विवशता ,मेरे प्रति आपके  आशीर्वाद रुपी स्नेह को कभी कम नहीं कर पायेगी ....सविनय .......

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