राजघाट में फिर से देखो गाँधी बाबा आये है
दूर तिमिर को करने हेतु नई रौशनी लाये है
राजघाट में ....................................................
सच फिर से उठ खड़ा हुआ है अहंकार के सामने
इन्कलाब फिर बोल दिया है हर रहीम हर राम ने
कितनी भी मक्कार हो दिल्ली अब तो रुकना ही होगा
भ्रष्टतंत्र को प्रजातंत्र के सम्मुख झुकना ही होगा
सत्य अंहिसा मुरझाये थे आज पुनः लहराए है
राजघाट में फिर ...............................................
हर निराश मन में नव आशाओं का है अब दीप जला
आज पुनः दीवानों का टोला है सडको पर निकला
आज पुनः सोई कविता को मिली नई अंगड़ाई है
आज पुनः हर घर आँगन में नई हवाएं आई है
आज पुनः शोषित हर मन ने नए तराने गाए है
राजघाट में फिर से देखो गाँधी बाबा आये है
दूर तिमिर को करने हेतु नई रौशनी लाये है..........बुधवार ३.४५ दोपहर
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