सो रहे राष्ट्र के जन-जन को हम आज जगाने निकले है
बारूद बिछा है इधर-उधर हम आग लगाने निकले है
देखे हममे कितना बल है
है सत्य आग्रह या छल है
देखे कितना भारी, भीषण
मन के भीतर दावानल है
जो स्वप्न सजोये आँखों ने हम उन्हें सजाने निकले है
बारूद बिछा है इधर-उधर हम आग लगाने निकले है .............११/०३/२०००
जो कायर हैं वह हट जायें
जो वीर हैं पथ पर डट जायें
कर के सब मृत्यु का आज वरण
जीवन संग्राम में जुट जायें
क्रान्ति प्यासी देवी को निज रक्त पिलाने निकले हैं
बारूद बिछा है इधर-उधर हम आग लगाने निकले है ............
जो कायर हैं वह हट जायें
जो वीर हैं पथ पर डट जायें
कर के सब मृत्यु का आज वरण
जीवन संग्राम में जुट जायें
क्रान्ति प्यासी देवी को निज रक्त पिलाने निकले हैं
बारूद बिछा है इधर-उधर हम आग लगाने निकले है ............
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