Kavi Chavi
Tuesday, June 7, 2011
shrigar ras ki ak kavita par tippni
आज छोडो प्यार की मनुहार की बाते सभी
छोड़ दो इकरार की ,इंकार की बाते सभी
आज तो बस आह उगलो आग की बांते करो
आज तो बस दब चुकी आवाज की बांते करो ....
रविवार ७.४५ रात्रि
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