Wednesday, June 8, 2011

kuchh shabd

१)"आज  ये झोंके हवा के तेरी खुशबु लाये है
यूँ लगा है फिर से जैसे हम जंवा हो आये है "


२)" मेरी गजलों से आती है ये कैसी खुशबु
    कल भी उसने चूम कर शायद इन्हें रख्खा होगा "

३) "मै परेशां हूँ ,उसे कह भी नहीं पाता हूँ
    मुस्कुराता हूँ मगर वो समझ ही जाती है "

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