"आज कलम के पास नहीं है प्यार और मनुहार की बाते
आज कलम के पास नहीं है रूप और श्रृंगार की बाते
आज कलम के पास नहीं है पायल और झंकार की बाते
आज कलम के पास नहीं है तीज और त्यौहार की बाते
आज कलम लिखने वाली है आग भरे संवादों को
आज कलम लिखने वाली है मानवता से , वादों को
आज कलम लिखने वाली भूखी नंगी फरियादो को
आज कलम लिखने वाली शोषित जन की आवाजो को
आज कलम उदघोष करेगी ,इन्कलाब को तोलेगी
आज कलम प्रतिरोध करेगी वन्दे-मातरम बोलेगी ..................................."
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