बहुत है सब्र सीने में
कंही ये टूट न जाए
किनारों ने बगावत की
समंदर सूख न जाए .....
कई चिनगारिया शोलो में
है तब्दील होने को
हजारो आँख बैठी है
नए सपने सजोने को
संभल जाओ, किसी भी
पेट में अब भूख ना आये
किनारों ने बगावत की
समंदर सूख ना जाये............
No comments:
Post a Comment