Monday, June 6, 2011

kusum thakur profile....

कुसुम जी ,७.१२ पर मैंने अपनी राय जाहिर कर दी थी ...जनता तो भोली है या शायद उसकी मजबूरी है भरोसा करना . वो चाहे नेता हो या समाज सेवी , या फिर एक बाबा ....अब इसके आगे क्या ? क्या खुद सड़क पर आ जाये बिना किसी नेतृत्व के ...प्रार्थना कीजिएगा वो दिन कभी न आये.आपातकाल को हम सब ने मिल कर झेल लिया ...लेकिन बिना नेतृत्व के जब जनता सड़क पर आएगी तो वह क्रांति रक्त क्रांति होगी ...न हम झेल पाएंगे न देश ....शनिवार ९.३९ प.म.

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