आज हवाओं ने भर दी है सांसो में है आग नई
जज्बातों की वीणा ने छेड़ी है कोई राग, नई
कलम कवी से रक्त मांगती कविता के प्रतिदान में
आज कलम फिर से बोलेगी इन्कलाब की शान में
आज पुनः हर एक कंकड़ शंकर-शंकर हो जायेगा
आज पुनः सच और झूट का सारा भ्रम छट जायेगा
आज पुनः संघर्षो को आवाज नई दी जाएगी
आज पुन अंधियारों में एक नई रोशनी आएगी
आज पुनः लाठी ,बंदूके जज्बातों से हारेगी
आज पुनः गाँधी की वाणी अहंकार को मारेगी ......बुधवार २.३० दोपहर
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