बाबा काश की आप राजनैतिक चालों को भी समझ पाते ...तो ये भ्रम की स्थिति निर्मित नहीं होती. जब मुद्दों के साथ जन भावनाये जुडी हो तब सब कुछ पारदर्शी होना चाहिए ...हारे आप नहीं है हरी तो वो लाखो ,करोडो जनभावनाए है जो आपके साथ चल रही थी ...आज उल्लुओ और कौओ के गुगुनाने का दिन है ....आज सत्य की कोयल का गला घोट दिया गया ...इसकी कुछ जिम्मेवारी आपकी भी बनती है.............रविवार ४.३८ प.म.
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