रामदेव का अनशन लोकतंत्र के दायरे में )
अभी संध्या के ७.१२ हो रहा है ...मै टेलीविज़न के सामने हूँ ...और देख रहा हूँ आम आदमी के भरोसे को ...करोडो लोगो की भावनाओ को एक बार फिर छला गया ...प्रजा फिर मंत्र और तंत्र के हांथो लुट गई .होटल के ५ घंटे की मीटिंग में ही आन्दोलन का चीरहरण हो चूका था ...उसके बाद का पूरा घटना क्रम बाबा और दिल्ली का स्नेह मिलन ...भोले देश वासियों ये विजय का नहीं पराजय का अवसर है ...पराजय के शौक में उपवास करे ....शनिवार ७.१२
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