"जो बीत गया सो बीत गया
मानव-मन गा तू गीत नया ...........
हर काल-खंड में तेरा ही सामर्थ्य रहा है
इतिहासों में गौरवशाली संघर्ष रहा है
सृष्टि-सृष्टा के ज्ञात और अज्ञात मौन में
श्रम तेरा ही था ,तेरा ही निष्कर्ष रहा है
तू हारा कब जो जीत गया
मानव-मन गा तू गीत नया ........
तू युगों-युगों के वैभव का संचित स्वर है
तू स्ययम ब्रम्हा ,विष्णु है स्ययम शिवंकर है
इस पावन धरती के कण-कण में तेरा ही तप है
करुना साहस से ओत-तू स्ययम नील-अम्बर है
क्या संचित बल अब रीत गया
मानव-मन गा तू गीत नया .........
भीतर की सारी पीडाओं को आज निगल ले
नव -वर्ष ,हर्ष ,उत्कर्ष भाव को गान प्रबल दे
दिन और तिथि तो मात्र एक जिज्ञासा है
विधि के विधान पर युग -युग का दुर्भाग्य बदल दे
ले नव-स्वर ,लय ,संगीत नया
मानव-मन गा तू गीत नया .............................................
मानव-मन गा तू गीत नया ...........
हर काल-खंड में तेरा ही सामर्थ्य रहा है
इतिहासों में गौरवशाली संघर्ष रहा है
सृष्टि-सृष्टा के ज्ञात और अज्ञात मौन में
श्रम तेरा ही था ,तेरा ही निष्कर्ष रहा है
तू हारा कब जो जीत गया
मानव-मन गा तू गीत नया ........
तू युगों-युगों के वैभव का संचित स्वर है
तू स्ययम ब्रम्हा ,विष्णु है स्ययम शिवंकर है
इस पावन धरती के कण-कण में तेरा ही तप है
करुना साहस से ओत-तू स्ययम नील-अम्बर है
क्या संचित बल अब रीत गया
मानव-मन गा तू गीत नया .........
भीतर की सारी पीडाओं को आज निगल ले
नव -वर्ष ,हर्ष ,उत्कर्ष भाव को गान प्रबल दे
दिन और तिथि तो मात्र एक जिज्ञासा है
विधि के विधान पर युग -युग का दुर्भाग्य बदल दे
ले नव-स्वर ,लय ,संगीत नया
मानव-मन गा तू गीत नया .............................................